मैं हिन्दी हूँ हिन्द देश के गौरवगाथा की पहचान।
मुझे मिला सम्मान तभी तो गौरव पाता देश महान।।
सभी बड़े बूढ़े पूर्वज ने सदा बढाया मेरा मान।
इसी वजह से विश्रुत था यह विश्वविदित प्रिय देश महान।।
सूर कबीर हुए तुलसी गुण गाये प्रभु के हुए महान।
माध्यम थी स्तुतिगायन की तब हिन्दी भाषा प्रबल सुजान।।
कालांतर में आजादी के बाद शुरु इक खेल हुआ।
अंग्रेजी में लिखना पढ़ना भाषा में भी रेल हुआ।।
सभ्य सुशिक्षित होने की परिभाषा इंग्लिश गढ़ी गयी।
चाहे अनचाहे भारत के जन मानस पर मढी गयी।।
फिर क्या था हम लोग बने साक्षर अंग्रेजी तूफ़ानी।
हृदय हुए मृत शिक्षित जन के शून्य विवेक बड़े मानी।।
जैसी भाषा पढ़ी लिखी मन सोच विचार हुआ वैसा।
साक्षर जन-गण बढ़े बहुत न सोच विचार मनुज जैसा।।
मैं इसीलिए कह रहा सदा हम अपनी ताकत पहचानें।
निज भाषा उन्नति देती है बात ये सच हम सब जानें।।
भारत माता की बिन्दी है हिन्दी को जन जन जाने।
हिन्दी दिवस को जनक्रांति के रूप में मन से हम ठाने।।
✍️अवनीश
शिवगङ्गा
दिनांक १४/९/२०२३