सन्तन के मुनिवृन्दन के मतिमान जनों के दुख हरती हो।
शीश विराजत छत्र चँवर उन राजन की रक्षा करती हो।।दास खड़ा तव द्वार समर्पित भाव स्वभाव दया करती हो।
मोहि पुकारत देर भई जगदम्ब बिलम्ब कहाँ करती हो।१।
मातु त्वदम्ब कृपा मिलने से समस्त अमङ्गल होत सुखारो।
दीन दु:खी जन की हो महेश्वरि तारिणी हारिणि भक्त पुकारो।
रक्ष सुरेश्वरि दीनन की हो सदा अवलम्ब बिलम्ब को टारो।
मोहि पुकारत देर भई जगदम्ब विपत्ति हरो अब सारो।२।
अवलम्बन हो तुम दीन जनों की समस्त विपत्ति को माँ हरती हो।
हो तुम ही जगदम्ब आकाश पाताल समेत धरा धरती हो।।
नाम जपे तव ध्यान धरे से समस्त निवारण होत विकारो।
माँ जगदम्ब कृपा करके यह रोग हरो अब संकट टारो।३।
अवनीश
💐💐🙏🙏
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें