गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

शिवस्तुति

शम्भुसदाशिव धरत ध्यान बाघाम्बरधारी कैलाशी

गौरी नंदी सङ्ग सदा अरु भृङ्गी सेवत अविनाशी।

खेलत सुत कार्तिकगणेश वृषवाहन शङ्कर अघनाशी

गङ्गजटा में चंद्रशीश पर शोभत पन्नग सुखराशी ।१।


देव दनुज मनु सेवत शिव को ध्यान निरत शिव अविकारी

गिरिजापति गिरिशिखर विराजित मुण्डमाल गल त्रिपुरारी।

पालक सर्जक प्रलयङ्कर हर महदेव शिव स्मरहारी

जटाजूट अरु सर्प सुशोभित दुष्टदलन प्रभु सुखकारी।२।


मृत्युञ्जय अभयङ्कर शङ्कर महाकाल शिव वरदानी

आशुतोष प्रलयङ्कर किङ्कर भक्तसदय औघड़दानी ।

दाता हो प्रभु तुम मङ्गलकर भर देते झोली दानी

दास तुम्हारे स्वर्णपुरी में रहते आप तो बर्फ़ानी।३।


महाकाल सृष्ट्यंतक विषधर नीलकंठ त्र्यम्बक शम्भो

महारुद्र महिपति अनंगरिपु अपराजित आनंद विभो।

ध्यानलीन कैलाशनिवासिन् भक्त अभयवरदान करो

ब्रह्म सनातन शाश्वत द्रष्टा संचालक जगदीश प्रभो।४।


पंचमुखी अर्धाङ्ग नीलगल वामदेव हो त्रिपुरारी

ज्येष्ठ आप हो श्रेष्ठ आप प्रभु विश्वनाथ कलिमलहारी।

भस्मविभूषित अङ्ग शंभु डमरूकर धृत नटनरनारी

नृत्यकरत नटराज राज सुरपति रामेश्वर शिवकारी।५।


भक्त अभयप्रद आशुतोष हर हर लेते विपदा सारी

सेवत नित्य जगत्पति तुमको ध्यान धरत रत नरनारी।

योगी हो योगेश्वर प्रभु तुम वरदहस्त धूर्जटि भारी 

पान करत हालाहल विष का भैरव तुम संकटहारी।६।


निराकार साकाररूप शिव आदि अनंत स्वयंभुव स्वामी

पारब्रह्म परमेश्वर सर्जक संहारक तुम अंतर्यामी ।

ग्यारहरुद्र महेश आपको ध्यावत इंद्रादिक नामी

दुःख हरो अवनीश भगत की हर शम्भो त्रिभुवनगामी

।७।


डॉ.अवनीश

ग़जल

अब तो मुझको गीत गजल लिखना होगा

दिल के भावों को शब्दों में लिखना होगा।


कहना होगा मन की सारी चतुराई को

कलम उठाकर हाथों में दिखना होगा।


होता है ये मन यारा अब तो विह्वल 

विह्वल मन से गीतप्रीत कितना होगा।


दिल में बसते हो स्वासों से तुम मेरे

धड़कन बनकर दिल में तुम्हें धड़कना होगा।


जीवन दिखता औरों का सीधा जितना

जीवन सीधा होता नहीं समझना होगा।


मेहनत करनी पड़ती है जीवन भर यारों 

दो रोटी की खातिर क्या-क्या करना होगा।


दुनिया इतनी सरल नहीं इसके नखरे हैं 

दुनिया के नखरों से बचकर चलना होगा।


दर्द को दिल में रख लो यारों तुम अपने

बेदर्दों से हरदम मिलना जुलना होगा।


मृगनयनी की कातर चितवन को देखा

खुद को भूला मृगतृष्णा में जलना होगा।


तेरी हिरनी सी मनमोहक रुत देखी

सबकुछ भूला अवनिश अब तो मिलना होगा।


  डॉ.अवनीश 

शिवगङ्गा वसुन्धरा 

 २१/०४/२६

    💐💐

व्रजरसमाधुरी

 मद्धम मद्धम पवन बहत नित रहत सुगंध लुटाई डाली डाली झूमत निसदिन लेत रहत अंगड़ाई। शुक सारिक डालिन पर निवसत रहत मंद मुसुकाई भागि सुभागि भयो अवन...