रविवार, 18 जुलाई 2021

ग़ज़ल

उनकी चाहत में मैं इतराने लगा।                              प्यार में पागल नज़र आने लगा।।

है किसी का दोष हरगिज भी नहीं
इश्क़ का मुझपर नशा छाने लगा।।

उनकी यादों को बना कर हमसफ़र
प्यार की मञ्ज़िल को मैं पाने लगा।।

आशिकी भी चीज क्या से क्या करे
हर घड़ी वो ही नज़र आने लगा।।

कोई भी ग़म हो मुझे या हो ख़ुशी
यादों में उसकी सुकूँ पाने लगा।।

क्या इसी को इश्क़ मैं भी मान लूँ
देख कर वो मुझको शर्माने लगा।।

क्यूँ भला देखूँ फलक की ओर मैं
चाँद धरती पर नज़र आने लगा।।

है अलग ही चाह दिल में बस गयी
दोस्तों अवनीश मुस्काने लगा।।

अवनीश
💐💐🙏🙏


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