गुरुवार, 25 अगस्त 2022

ग़जल

 *ग़ज़ल*


दिल में जो छुपाया है बोलना चाहेंगे

उसे दिल से मिटाया है बोलना चाहेंगे।


करेंगे जतन मिटादें उसकी यादों को

उसे हमने भुलाया है बोलना चाहेंगे।


वो हरगिज़ न रहेगा यादों में मिरी

याद बनके सताया है बोलना चाहेंगे।


बड़ा गुरुर था उसे मुझे अपने प्यार पर

हालात ने मिटाया है बोलना चाहेंगे।


फलक के चाँद से बातें किया रातें जगी मैंने

माहताब भी शर्माया है बोलना चाहेंगे।


अच्छा सिला दिया है मेरे यार ने मुझे 

जो भी खोया पाया है बोलना चाहेंगे।


दुनियादारी भी होती है क्या खूब अवनीश

अपनों ने सितम ढाया है बोलना चाहेंगे।


जहाँ में कुछ यहाँ रख्खा नहीं है दोस्तों सुनों

हर इक चाह ने तड़पाया है बोलना चाहेंगे।


सुब्ह शाम सातों दिन है दररोज का चक्कर

पेट पीठ तक  सट आया है बोलना चाहेंगे।


बुरा वक़्त है हालात बुरा कौन चाहता

अपना भी हुआ पराया है बोलना चाहेंगे।


     अवनीश

💐💐🙏🙏

मंगलवार, 9 अगस्त 2022

स्वाधीनतागौरव

 हमारे पंथ मजहब धर्म में हो भिन्नता लेकिन

जहाँ हो बात भारत की तो फिर मत एकता होगी।

रहेगा कोई न हिन्दू न मुस्लिम सिक्ख ईसाई

जहाँ हो बात भारत की तो बस राष्ट्रीयता होगी।१।


हैं झण्डे सबके अपने आप में बहुमूल्य अरु शोभित

मगर एक राष्ट्र के ध्वज में समन्वित शक्ति निर्बाधित।

न कोई हैं यहाँ छोटा बड़ा न कोई भारत में 

सभी मिलजुल के रहते हैं जगत में कीर्ति है भाषित।२।


है भारत देश ये प्यारा है इसकी बात ही न्यारी

यहाँ की सभ्यता पावन है इसकी संस्कृति प्यारी।

किया दुनियाँ ने भारत को नमन चिरकाल से ही है 

यहाँ की है यही शिक्षा धरा ये है कुटुम सारी।३।


हुये ऋषिगण यहाँ पर ही अनेकों शास्त्र के धर्ता

पतंजलि मुनि ही तो हैं योग अरु नवभाष्य के कर्ता।

हैं भारत भूमि के आचार्य चाणक अर्थ शास्त्री भी

है नीति आज भी उनकी प्रथित थे नन्दकुल हर्ता।४।



यहाँ गुरु की कृपा से शिष्य नवजीवन को पाते हैं 

यहाँ सन्मार्ग पर चलना सदा गुरुजन सिखाते हैं।

यहाँ गुरु ही विवेकानंद अरबिंदो को हैं गढ़ते 

यहाँ ले जन्म मानव का सदा देवादि आते हैं।५।


मनाया जा रहा है पर्व अमृत मान भारत का

लहरता है तिरंगा आसमां में शान भारत का।

इसी का मान रखने को हुए लाखों हैं न्योछावर

दिलाता याद है ये दिन अमर अभियान भारत का।६।


✍️अवनीश

     शिवगङ्गा 

   ९/८/२०२२

 💐💐🙏🙏

रविवार, 7 अगस्त 2022

नमन है शारदा को।।

नमन है ज्ञानदा अरु शारदा को सर्वदा सततम।

करें मतिमन्दता को दूर जो अज्ञान को हरदम।१।


विनाशें भक्तगण के मनतिमिर को तेज से भर दें।

मिटा संशय सदा जीवन बना उज्ज्वल सफल कर दें।२।


भगवती शारदा वरदा प्रवाहित ज्ञानगङ्गा कीजिये।

मति को विमल करके सकल अज्ञानता हर लीजिये।३।


सभी का स्वच्छ हो मन अरु मुदित जनजन का जीवन हो।

सभी सज्जन बनें सुधिजन करें शुभकर्म वर्धन हो।४।


मनोरथ पूर्ण करती हैं सदा वरदायिनी माता।

उन्हीं की हो कृपा तो है मनुज बुद्धि प्रबल पाता।५।


सदा ही ज्ञान की देवी को भजते हैं सभी मुनि जन।

करें हम भी भजन माता का पावन हो सदा तनमन।६।


हमें भी भक्ति अपनी दीजिये वरदायिनी माता।

भगवती आपकी ही तो कृपा से बुद्धि जन पाता।७।


✍️अवनीश

    शिवगङ्गा

   ३/८/२०२२

  💐💐🙏🙏


गज़ल

 हर घड़ी हर पल किया महसूस अपने प्यार को।

दिल में रक्खा है बसाकर मैंने अपने यार को।१।


डोर उनसे जुड़ गई है इसकदर की क्या कहूं।

सोचता हूं मुस्कुरा करके दिल ए गुलज़ार को।२।


पास आना उनका होता था बहुत ही खुशनुमा।

आज भी होता हूँ पुलकित यादकर सरकार को।३।


उनके आने के ही पहले फैलती खुशबू थी जो। 

आज भी बेचैन होता याद कर इकरार को।४।


उनसे मिलते ही समय था भागता सरपट बड़ा।

पल दो पल सा दिन मुझे लगता था हर इतवार को।५।


आज भी यादें सजा रक्खी हैं हमने मखमली।

गुनगुना लेता हूँ नगमें याद कर फनकार को।६।


दिल दुआयें आज भी अवनीश का देता सदा।

हो जहाँ भी जान ले वो मेरे इन उद्गार को।७।


 ✍️ अवनीश 

       शिवगंगा

     ७/८/२०२२

    💐💐🙏🙏

गज़ल

दिल बहुत कमजोर दिखने अब लगे हैं

लोग अपनों से ही छिपने अब लगे हैं।१।


स्वार्थ हावी हो गया है इस कदर कि

सारे रिश्ते आप मिटने अब लगे हैं।२।


स्वार्थ है कारण कि घुटता दम सभी का

हार्ट पीड़ित लोग दिखने अब लगे हैं।३।


दिल को चीरे रोज लगते हर शहर में

स्टंट छल्ले पंप बिकने अब लगें हैं।४।


दिल नहीं लगते कि दिल हों आदमी के

खोट दिल में आज टिकने अब लगे हैं।५।


हो गयी हावी है माया इसकदर कि

पाप कर इन्सान हंसने अब लगे हैं।६।


सच में पीड़ित आज मन अवनीश का

ये व्यथा इतनी कि लिखने अब लगे हैं।७।


✍️ अवनीश

      शिवगंगा 

    ६/८/२०२२

    💐💐🙏🙏

गज़ल

 ये तपिस तो मौसमी हरगिज नहीं है

स्वस्थ तन मन हो न तो कुछ भी नहीं है।१।

आग बरसेगी अगर फिर आसमां से
कौन बोलेगा कि गर्मी ही नहीं है।२।

बीज बोयेंगे कहां से हम सभी
बूंद पानी की अगर गिरती नहीं है।३।

फल चखेंगे आम का कैसे सभी
बीज बोया आप सबने ही नहीं है।४।

दूध पीना चाहते हैं हम मगर
गाय को अब पालता कोई नहीं है।५।

हैं सभी सम्मान पाना चाहते पर
खुद कभी सम्मान करते ही नहीं हैं।६।

जिंदगी में हैं बहुत दुश्वारियां
मंजिलें आसान बिल्कुल भी नहीं हैं।७।

✍️अवनीश
    शिवगङ्गा
  ७/८/२०२२
💐💐🙏🙏

गुरुवार, 4 अगस्त 2022

मनभावन सावन

मनभावन सावन नीक लगे
चहुं ओर बयार फुहार जगे।
मनमीत क बाट क जोहि रहे
हिय प्रीति पुकार पुनीत लगे।१।


कब भेंट पिया हमसे करिहैं
अगिया मन के तन के हरिहैं।
बिन पीय के हूक उठे मनमें
सजना एहि पीर के का हरिहैं।२।

पतिया लिखि बाँचि क काटत हम
दिनराति दुवार क झांकत हम।
खटिया गोनरी तकिया चदरा
लइ धावत का पिय पावत हम।३।

सवना बदरा कब नीक लगे
बरखा सजना बिनु फीक लगे।
पुरवा मदमस्त भई मचले
पिय मोर घरे हमरे न चले।४।

झुलवा उनके संग झूलब हम
कजरा बदरा देखि फूलब हम।
गितिया रचि सावन मास सदा 
पियवा दुःख दर्द त भूलब हम।५।

कजरा गजरा टिकुरी बिंदिया
सजिके सजना के निहारब हम।
कुछ रूठि के दर्द सुनाइ सुनब
पियके हिय लागि सवांरब हम।६।

हम पूंछब सौत बसाए ह का
जवने से हमें बिसराइ दिहै।
दिन मास गये बिति जेठ अषाढ़
पिया घर के किनराइ दिहै।६।

अवनीश हरीश के माथ नवैं
पिय हीय में नित्य समाई रहैं।
संग राधिका देवि क साथ सदा
जेहि भांति प्रभू श्रीकृष्ण लसैं।७।


  ✍️अवनीश
      शिवगंगा
   १/८/२०२२
  💐💐🙏🙏

व्रजरसमाधुरी

 मद्धम मद्धम पवन बहत नित रहत सुगंध लुटाई डाली डाली झूमत निसदिन लेत रहत अंगड़ाई। शुक सारिक डालिन पर निवसत रहत मंद मुसुकाई भागि सुभागि भयो अवन...