रविवार, 17 जुलाई 2022

गज़ल

 आज हूं लाचार धीरज मैं  दिखाऊँगा।

मेहनत से राज करके मैं दिखाऊंगा। 


वक़्त का है काम चलना खुद के ढर्रे पर।

ज़िन्दगी को भी मुक़द्दस मैं बनाऊँगा। 


जो भी दुःखियारे हैं उनके दर्द को हूँ जानता।

दर्द में हमदर्द बनकर मैं हँसाऊँगा। 


वक्त कब रुकता जहाँ में हो भला या हो बुरा।

अनवरत चलता इसे रोक क्या मैं पाऊँगा। 


हौसलों से ही तो होती हैं उड़ानें आसमां में।

बन परिन्दा जोश के पर मैं लगाऊँगा। 


आज के इस दौर में  छाया घना कुहरा तो क्या?।

धैर्य रख अवनीश अच्छे दिन मैं लाऊँगा। 


अवनीश 

31/5/2022

शिवगंगा 


नारी

       *नारी-शक्ति*

इस दुनियाँ की कारण नारी

दुःख समस्त निवारण नारी।

सृष्टि की है मूल में न्यारी

माता,भगिनी,पत्नी प्यारी

।१। 

सबसे ऊँची पद्वी इसकी

प्रथम गुरु भी माँ ही होती।

नारी शक्ति है विश्वपोषिणी

नारी है देवी सम होती।२। 


नमन सदा नारी समष्टि को

रखती सदा एक व्यष्टि जो।

ऐसी उस नारी का वन्दन

नारी का करते अभिनन्दन ।३। 


नारी ही माँ अनसूया है

ईश का शीश झुका देती।

नारी की है अद्भुत क्षमता

सत्यवान को बचा लेती।४। 


काल कराल से भी रक्षा कर

सुत को जो पोषित करती।

नारी ही तो निज ममत्व से

शिशुओं में जीवन भरती।५।


  अवनीश

💐💐🙏🙏

फूल

फूलों को दिल से उगाता कोई

फूल खिलते ही फोटो खिंचाता कोई।


है बनावट की दुनियाँ जहाँ देख लो
काम बनते ही हक़ को जताता कोई।।

फूल खिलते हैं गुलशन में हरदम मगर
उनके जैसी खुशी काश लाता कोई।।

रङ्ग फूलों के होते बहुत से मगर
फूलों सी ताजगी को दे पाता कोई।।

टूटकर भी सदा फूल देते खुशी
उनसे कुर्बां होना सीख पाता कोई।

फूल होते हैं नाजुक बहुत ही मगर
फूल सा सब्र खुद में ले आता कोई।

खुद की कीमत पे औरों को देना खुशी
काश फूलों से ये सीख पाता कोई।

आदमी आदमी से करे बस वफा
बेवफाई को दिल से भगाता कोई।

फूल हरदम खिलें जिन्दगी में मगर
फूल अरमां में शायद समाता कोई।।

  अवनीश
  शिवगङ्गा
02/6/2022

गज़ल

 हरसूँ वो ही नजर आये किसी और को क्या

दिल को वो ही मेरे भाये किसी और को क्या। 


याद उसकी हमें आये लाये खुशी या कि ग़म

दिल में मेरे वो समाये किसी और को क्या। 


हम अपने दिल के बादशाह रियाया हैं ख्वाहिशें

चाहे जिसको जो फरमाये किसी और को क्या। 


दूर-दूर तक फैला हुआ कुहरा घना तो क्या

मंज़िल हमें बुलाये किसी और को क्या। 


गुर्बत में ज़िन्दगी को कह देते बेवफा हैं 

हूँ उसे गले लगाये किसी और को क्या। 


मुफ़लिसी भी काम की है न होता हूँ मायूस

अपना गैर सब बताये किसी और को क्या। 


हम सब हैं मुसाफ़िर है चन्द दिन की भागदौड़

किरदार अपना हम निभाये किसी और को क्या। 


दिल चीज क्या हम अपनी जान ओ तन करें कुर्बान। 

दिल में उसका नशा छाये किसी और को क्या। 


नज़रिया मुख्तलिफ हरेक का है खुद ही देख लो 

हरसूँ वो ही नजर आये किसी और को क्या।। 


  अवनीश 

  शिवगङ्गा

02/6/2022


प्रकृति प्रेम

 समझ गए हैं सब नर-नारी

करते चर्चा गहरी न्यारी।
वृक्ष लगा हम जीवन पायें
प्रकृति संग हम सब मिल जायें।

बिना प्रकृति के विकृति सारी
हो अनुकूल प्रकृति हितकारी।
हरा-भरा जंगल दे जीवन
खूब लगाओ सब मिलकर वन।

वृक्ष करें सुखमय नित जीवन
शुद्धवायु देते नित उपवन।
ऋणी सदा प्रकृति के हैं हम।
जीवन सुगम बनाते हरदम।

आश्रय दाता वृक्ष ही सबके
जीवजन्तु सब रहते बसके।
मानव हों या हों पशु-पक्षी
प्रकृति प्रेम से धरती सजती।।

अवनीश
शिवगङ्गा 

देवी स्तुति

 देखि क देवि क शक्ति अपार गये सब राक्षसगन अकुलाई।

मारति काटति टूटि पड़िनि जग शून्य करिनि जगदम्बइ माई।

एक से एक बढैं भट जोधा करैं सब जुद्ध बड़ा बलशाली।
माई करैं सिर हीन हतप्रभ होत महासुर कै भट खाली।

छिन छिन माइ बहावैं रक्त पियैं रणचण्डी विनाशैं काली।
हाथ कपाल लिये अरु खड्ग भयानक रूप धरैं मतवाली।

काँपैं थराथर सैन्य समेत बड़ा मदमस्त रहैं जु मवाली।
भागहिं भागि सकैं नहि राछस दैत्य दलन कई ढारैं काली।

भेजत शुम्भ निशुम्भ महाभट एक से एक महाभट भारी।
माई करै संहार चराचर कै रखवार अहैं महतारी।

देखत जुद्ध अपार करैं सब देव आकास से अस्तुति न्यारी।
देवगणादि भये सब हर्षित फूल कै बृष्टि करैं बड़भारी।

माई सहाय भई जगदम्ब बिपत्ति पड़ी जग पै जब भारी।
आयल जुद्ध करै तब दानव रक्तहिं बीज बड़ा भयकारी।

मारहिं माई जबै ओहि दानव रक्त बहै उपजैं भट भारी।
रक्त धरा पर ज्यों गिरिजात अनेक बढैं दानव व्यभिचारी।

माई कहिनि तब धाइ के चण्डिका झटपट से मुँहवा तूं  बढ़ावा।
रक्त बहै जब रक्तहिं बीज क लै मोहमां तुं समूल चबावा।

देखत देखत खून पड़ा कम अन्त अनन्त भया भटभारी।
मारब रक्तहिं बीज सुनि अति क्रोधित शुम्भ भया भयकारी।

भेजेस भाई निशुम्भ के साथ पठायेस सैन्य बड़ा भयकारी।
जाई निशुम्भ मचायेस ताण्डव देव गयेन डरि सोक में भारी।

ज्यों रणभूमि में देखिनि दुर्गा निशुम्भ पे टूटिनि दुर्गति हारिणि।
बक्ष पे शूल प्रहार करिन्हि महि शून्य निशुम्भ करिनि भयतारिणि।।

क्रोधित शुम्भ सुनेसि बिरितान्त महाभट धायेस धूसर भारी।
सैन्य समेत चलेसि मदगर्वित धूरि उड़ै त अन्हार भा भारी।

जाई महाभट जुद्ध कै भूमि में दुर्गति हारिणि कै लालकरेसि।
त्यों जगदम्बहिं माई के ऊपर बांणन कै बरखा कई ढारेसि।

माई बिलम्ब न कीन्हि गहैं निज हाथ में शूल से शुम्भहि मारैं।
दैत्यमहाबल वीर पराक्रम माई के मारे से स्वर्ग सिधारैं।।

दुर्गति हारिणि दुर्गा भवानि हरा जन कष्ट के दुःख निवार।
माइ सहाइ बना जगदम्ब बिलम्ब किये बिनु भागि सवांर।।

     अवनीश
शिवगङ्गा वसुन्धरा
13/10/2021
  💐💐🙏🙏

गज़ल आज हूं लाचार

 आज हूं लाचार धीरज मैं  दिखाऊँगा।

मेहनत से राज करके मैं दिखाऊंगा।

वक़्त का है काम चलना खुद के ढर्रे पर।
ज़िन्दगी को भी मुक़द्दस मैं बनाऊँगा।

जो भी दुःखियारे हैं उनके दर्द को हूँ जानता।
दर्द में हमदर्द बनकर मैं हँसाऊँगा।

वक्त कब रुकता जहाँ में हो भला या हो बुरा।
अनवरत चलता इसे रोक क्या मैं पाऊँगा।

हौसलों से ही तो होती हैं उड़ानें आसमां में।
बन परिन्दा जोश के पर मैं लगाऊँगा।

आज के इस दौर में  छाया घना कुहरा तो क्या?।
धैर्य रख अवनीश अच्छे दिन मैं लाऊँगा।

अवनीश
31/5/2022
शिवगंगा 

पिता

पिता के त्याग तप से ही सुखी सन्तान होती है

पिता के बिन कहाँ ये जिन्दगी आसान होती है।

पिता है वो जो खुदको कर तिरोहित पुत्रहित साधे 

पिता के बिन हमेशा हर खुशी अनजान होती है।१।

पिता ही मार्गदर्शक है भला निःस्वार्थ जो चाहे

बढ़े आगे सदा ही सुत पिता ही है जो ये गाहे।

लुटाता जो बिना परवाह बेटे के लिये हस्ती

पिता ही पुत्र को आगे बढ़ाकर फर्ज निर्बाहे।२।

शिवस्तुति

सावन नीक लगे तबसे जबसे बदरा घनघोर देखाता।

भांग धतूर चढ़े शिव के जलधार के धार से शान्ति समाता।
पूजिके भक्त सदैव प्रसन्न समस्त अमंगल दूर हो जाता।
भोले के नाम जपे से सुखी सुख शान्ति समृद्धि के देत विधाता।१।

द्वादश ज्योतिर्लिंग अलौकिक साम्बसदा शिवरूप पुजाता।
पण्डित वेद क पाठ करें अभिषेक करें नित मन्त्र सुनाता।
दुग्ध दही घृत शर्करा आसव से विधिपूर्ण नहान कराता।
पूरण होत सदा सतकाम जपे शिवनाम से काल डेराता।२।

नाथ हैं साथ जहां जिनके तिनके सब काज सुकाज हो जाता।
नाम महेश्वर है प्रभु के मृत्युञ्जय से खुद मृत्यु डेराता।
भक्त के झोली भरें त्रिपुरेश्वर वास करें हिमशैल विधाता।
ध्यान धरें शिव नित्य दिगम्बर पूरणकाम करें नित दाता।३।
        अवनीश
     💐💐🙏🙏

व्रजरसमाधुरी

 मद्धम मद्धम पवन बहत नित रहत सुगंध लुटाई डाली डाली झूमत निसदिन लेत रहत अंगड़ाई। शुक सारिक डालिन पर निवसत रहत मंद मुसुकाई भागि सुभागि भयो अवन...