माँ की ममता के आगे तो। सब कुछ ही बौना लगता है। माँ का ही जग में ईश्वर सा। एक रूप सलोना लगता है।१।
ईश्वर ने ही माँ को अपनाजन प्रतिनिधि है सुदृढ़ किया।
है सर्व सहा धारण कर्त्री
माता ने शिशु को जन्म दिया।२।
माता ही तो सहने वाली निज
रक्त पिला शिशु बड़ा किया।
निज तनय को सूखे में रखकर
खुद रात-रात रत जगा किया।३।
खुद आधे पेट भी खा करके
माता ने शिशु को पुष्ट किया।
नित लात सही नन्हें शिशु की
फिर भी न उसको रुष्ट किया।४।
माता धरती माता माता
गौ माता ही बस माता हैं।
ये तीनों ही हैं सहनशील
जिससे यह जग चल पाता है।५।
माता के स्नेहसुधामृत से
बच्चों का पोषण होता है।
होते हैं बच्चे हृष्ट पुष्ट
जब माँ का आँचल होता है।६।
माता का कहीं विकल्प सुनो
ना जग में संभव होता है।
माता की गोदी में ही तो
शिशु निर्भय होकर सोता है।७।
ईश्वर भी माँ की ममता को
पाने इस धरा पे आते हैं।
कभी राम बने कभी कृष्ण सखा
माता की गोद में जाते हैं।८।
है धरा धन्य इस भारत की
मातायें पूजित सदा सचर।
माताओं के बल से ही
हैं हुये कोटिशःवीर अमर।९।
अवनीश
💐💐🙏🙏
रक्त पिला शिशु बड़ा किया।
निज तनय को सूखे में रखकर
खुद रात-रात रत जगा किया।३।
खुद आधे पेट भी खा करके
माता ने शिशु को पुष्ट किया।
नित लात सही नन्हें शिशु की
फिर भी न उसको रुष्ट किया।४।
माता धरती माता माता
गौ माता ही बस माता हैं।
ये तीनों ही हैं सहनशील
जिससे यह जग चल पाता है।५।
माता के स्नेहसुधामृत से
बच्चों का पोषण होता है।
होते हैं बच्चे हृष्ट पुष्ट
जब माँ का आँचल होता है।६।
माता का कहीं विकल्प सुनो
ना जग में संभव होता है।
माता की गोदी में ही तो
शिशु निर्भय होकर सोता है।७।
ईश्वर भी माँ की ममता को
पाने इस धरा पे आते हैं।
कभी राम बने कभी कृष्ण सखा
माता की गोद में जाते हैं।८।
है धरा धन्य इस भारत की
मातायें पूजित सदा सचर।
माताओं के बल से ही
हैं हुये कोटिशःवीर अमर।९।
अवनीश
💐💐🙏🙏
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें