रविवार, 18 जुलाई 2021

दोहा गीत

करता हूँ गुरु नाम जप मन में आठों जाम।।              जीवन को जो नित्यशःकरते प्रतिपल धाम।।

मिट्टी के कच्चे घड़े होते शिष्य अजान।
देते गुरु सन्मार्ग से उत्तम जीवन ज्ञान।
सिद्ध सदा गुरुदेव से जीवन के सत्काम।1।

शिष्य पुत्र सम लोक में रहता गुरु के पास।
शिष्य गुरु के स्नेह से बढ़ता दृढ विश्वास।
पाते हैं सब शिष्यगण जग में अद्भुत नाम।2।

जीवन सफल बने सदा गुरु हैं सकल निधान।
शिष्यों से जो सर्वदा कहते कर्म विधान।
जगदीश्वर के रूप गुरु विपदा लेते थाम।।3

कहते हैं गुरु ब्रह्म हैं गुरु ही विष्णु महान।
गुरु ही तो शिव हैं स्वयं गुरु ही परम सुजान।
गुरु ही हैं गुरुतर बहुत गुरु ही सब आयाम।4।

गुरु ही हैं रवि-चन्द्र सम गुरु ही पवन समान।
गुरु ही तो करते सकल दूर सतत अज्ञान।
गुरु के ही श्रीचरण शुभ करते मङ्गल काम।5।

मुझ पर भी गुरु जी सदा करिये दया आपार।
बिन गुरुदेव दया कहो शिष्य कहाँ भवपार।
प्रणति करत अवनीशधर गुरु ही पूर्ण विराम।6।

   अवनीश
💐💐🙏🙏

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