अब तो मुझको गीत गजल लिखना होगा
दिल के भावों को शब्दों में लिखना होगा।
कहना होगा मन की सारी चतुराई को
कलम उठाकर हाथों में दिखना होगा।
होता है ये मन यारा अब तो विह्वल
विह्वल मन से गीतप्रीत कितना होगा।
दिल में बसते हो स्वासों से तुम मेरे
धड़कन बनकर दिल में तुम्हें धड़कना होगा।
जीवन दिखता औरों का सीधा जितना
जीवन सीधा होता नहीं समझना होगा।
मेहनत करनी पड़ती है जीवन भर यारों
दो रोटी की खातिर क्या-क्या करना होगा।
दुनिया इतनी सरल नहीं इसके नखरे हैं
दुनिया के नखरों से बचकर चलना होगा।
दर्द को दिल में रख लो यारों तुम अपने
बेदर्दों से हरदम मिलना जुलना होगा।
मृगनयनी की कातर चितवन को देखा
खुद को भूला मृगतृष्णा में जलना होगा।
तेरी हिरनी सी मनमोहक रुत देखी
सबकुछ भूला अवनिश अब तो मिलना होगा।
डॉ.अवनीश
शिवगङ्गा वसुन्धरा
२१/०४/२६
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