शनिवार, 24 जुलाई 2021

ग़ज़ल

 बह्र:-2122 2122 2122 2122

फ़ाइलातुनx4 


लोग कहते हैं गई जो इश्क का जादू चलाकर।

वो खयालों में छिपी है नींद को मेरी भगाकर।


नींद का माहिर तपस्वी था बहुत ही सिद्ध मैं तो।

पड़ गया हूँ इश्क में अब नींद को अपनी भुला कर।2।


इन हसीनाओं की बातें दूर से लगती भली हैं।

पास से देखो तो रखती हैं हमें हरदम रुला कर।3।


पा सबक मैं दे रहा सबको सलाहें मान लो ये।

खुद से मत फन्दा लगाना ख्वाहिशें अपनी बढाकर।4।


इश्क के दरिया में आखिर साहिलों को ढूंढना क्यूँ।

लोग इसमें तैरते हैं होश को हरदम गवांकर।5।


इश्क में दुनियाँ की होती सैर,बातें चटपटी पर।

कह रहा अवनीश सच,समझो,रहो इज्जत बचाकर।6।


   अवनीश

💐💐🙏🙏


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