#बह्र:-22 22 22 22 22 22 22 2
#आरों #काफिया #और
#पर #रदीफ़
जनता से है लोकतन्त्र यह जनता के संचारों पर।
जनता का हक़ लोकतंत्र के बुनियादी अधिकारों पर।1।
जनता को यूँ मूर्ख समझना नेताओं अब कर दो दूर।
जनता तो सब जान रही है पोस्टर जो दीवारों पर।2।
अब यह जनता समझ रही है नेताओं की सारी चाल।
चिकनी चुपड़ी बातें करते मतदानी त्योहारों पर।3।
रैली में हैं नेता रटते जनता के अधिकारों को।
कौन भरोसा करे असल में कागज के किरदारों पर।4।
दु:खियारे लोगों का जीवन देखो कितना विपत भरा।
भूखे प्यासे सो जाते हैं नीचे ही अखबारों पर।5।
दुःखित पीड़ित शोषित वंचित कृषक वर्ग का दर्द कहाँ?
हमने अब यह ठाना है कि सत्य कहें सरकारों पर।6।
लोकतंत्र का अजब मन्त्र है सिद्ध हुआ नेताओं को।
पाँच साल में पड़ती थापें देखो ढोल नगारों पर।7।
कलमगार हूँ सत्य कहूँगा पीर लिखूँगा हर मन की।
लिखता ग़ज़ल नहीं मैं केवल मादक नयन कटारों पर।8।
अब क्यूँ है पछतावा करना भीग रहा हर कोना जब।
हमने ही तस्वीर बनाई मिट्टी की दीवारों पर ।9।
अवनीश
💐💐🙏🙏
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