#ग़ज़ल:-1222 1222 122
नहीं ऐ जिंदगी तुझसे खफा हूँ।
भले हालात का मारा हुआ हूँ।
गरीबी भा गई है इस कदर कि
गरीबी से ही मैं हारा हुआ हूँ।
मुसीबत नाम ही है जिंदगी
मुसीबत का ही मैं चारा हुआ हूँ।।
निभाती जिस क़दर यारी मुसीबत
उसी शिद्दत को मैं प्यारा हुआ हूँ।
जहाँ में कौन जो चाहे मुसीबत
यहाँ हालात से खारा हुआ हूँ।
नहीं कोई सताये अब किसी को
सताया उम्र भर यारा हुआ हूँ।
बड़ी कातिल अदा है ये मुसीबत
कहे अवनीश अब न्यारा हुआ हूँ।।
अवनीश
💐💐🙏🙏
अति सुंदर
जवाब देंहटाएं