रविवार, 18 जुलाई 2021

अगर रोक लेते

मैं खुद मान जाता अगर रोक लेते।          

ये दिल मुस्कुराता अगर रोक लेते।

तुम्हारे बिना जिंदगी थी अधूरी
जिया चैन पाता अगर रोक लेते।

मुझे दूर तक की पड़ी भी कहाँ थी
न फूला समाता अगर रोक लेते।

कहूँ भी तो कैसे के तुम तो बुरे हो
नहीं दिल रुलाता अगर रोक लेते।

सुहाना सफर ज़िन्दगी का हो जाता
मैं खुद हार जाता अगर रोक लेते।

न पीता जुदाई जहर जिन्दगी में
न दिल कस्मसाता अगर रोक लेते।

पड़ी तेरी राहों में खुशियाँ भी होतीं
न दिल ये सताता अगर रोक लेते।

मेरी ज़िंदगी में भी खुशियाँ समातीं
तुम्हें क्यों भुलाता अगर रोक लेते।

बड़ा दर्द है दिल की सुनने में यारों
न बाहर ये आता अगर रोक लेते।

जो पायी है मैंने जगह ज़िन्दगी में
कहाँ से वो पाता अगर रोक लेते।

कभी बातें करता जो अवनीश खुदसे
न वो कोसा जाता अगर रोक लेते।।

अवनीश
💐💐🙏🙏

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