शनिवार, 24 जुलाई 2021

ग़ज़ल


समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है।

समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।।


समय का खेल कुछ यूँ है कि कट जाए  हो जैसा भी।

कहीं गर हो बुरा तो भी ये अनुभव ही कराता है।।


बड़ा बलवान होता है समय इसकी बड़ी बातें।

कोई कितना भी सँभले पर  निवाला हो ही जाता है।।


समय को जिन्दगी में जो समझ ले है समय उसका।

अजब हैं खेल इसके ये कहाँ कुछ भी बताता है।।


अगर आमाल हो तेरे समय के साथ उम्दा तो।

सिला देकर  समय भी हौसला तेरा बढ़ाता है।।


फकीरी में मजा है जिंदगी का जान ले यारा।

नहीं छोटा बड़ा कोई समय ये भी सिखाता है।।


मैं वाकिफ़ हूँ समय की चाल से अवनीश जीवन में।

बड़ी से भी बड़ी ये सल्तनत को भी मिटाता है।।


✍️ अवनीश

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