शनिवार, 24 जुलाई 2021

"प्रियतमा-निर्झरिणी"

 

जीवन भर का साथ अगर मिल जाये तेरा।

जीवन धन्य हो बन जाये खुशियों का डेरा।


भाग दौड़ कर अपनी प्यास बुझाने को।

नदी नदी न घाट घाट हो जाने को।


अपनी ही बलखाती नदी का शीतल निर्मल।

पानी मिले अधर की प्यास मिटाने को।


मेरे खारे जीवन को तुझ नदिया का।

शीतल मीठा निर्मल जल हर्षाने को।


कभी-कभी तो बाढ़ सी भी आ जायेगी।

नदिया प्यारी सागर में मिल जाने को।


मेरे जीवन का सारा खारापन उसके।

मीठे पावन जल से खुद धुल जाने दो।


मेरा घर भी निर्झरिणी के शीतल जल से।

सुरभित झंकृत पावन सा बन जाने दो।।


अवनीश।।

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