हमें बीते पल याद आने लगे हैं।
ग़ज़ल अपनी हम गुननाने लगे हैं।।
हमें क्या हुआ है कहें भी तो क्या हम।
तराने मोहब्बत के आने लगे हैं।।
कथानक बहुत से हृदय में हैं ताजे।
जिन्हें सोच कर मुस्कुराने लगे हैं।।
बड़े खूबसूरत थे बचपन के वो दिन।
हम बचपन के मृदु गीत गाने लगे हैं।।
हमें याद है माँ की लोरी,कहानी।
हम परियों को दिल में सजाने लगे हैं।।
पुराने समय के जो बीते हैं किस्से।
वही याद बनकर सताने लगे हैं।।
जिन्हें भूलकर छोड़ आये थे पीछे।
कई जख़्म फिर याद आने लगे हैं।।
कभी नींद से वो जगा मुझको देते।
कभी ख़्वाब बनकर वो आने लगे हैं।।
हैं जीवन के दस्तूर अपने निराले।
बँधे जिनसे सब छटपटाने लगे हैं।।
कलम कैसे लिख दे सफर जिन्दगी का?
जहाँ लोग सच को छुपाने लगे हैं।।
अवनीश।।
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