रविवार, 18 जुलाई 2021

जूता

 जूते की अपनी कथा अलग                               जूते की अपनी व्यथा अलग।                             जूते से रोब झलकता है                                   जूता क्या खूब मटकता है।१।

जूते में सब गुण ही गुण हैं
अवगुण नित दूर करे गुण है।
हर मर्ज की होती दवा जहाँ
हम उसको जूता कहते हैं।२।

यह जूता पाँव बचाता है
पथ कंटक से लड़ जाता है।
जब ठोकर लगती जीवन में
जूता सन्मार्ग दिखाता है।३।

घर में जिसने खाया जूता
बचपन से जो पाया जूता।
बाबू जी से बाबा जी से
जो जूता खाये जग जीते।४।

है खुलती दिव्य चक्षु जन की
जब जूते की है डर दिखती।
बालक होता है परं सजग
जब जूते की आहट मिलती।५।

हम भारतवासी जन-जन का
विस्वास अटल है जूते में।
गुरुजन से मिलता शुभाशीष
जूते जब पड़ें महीने में।६।

इसलिये कह रहा मैं सुनिये
जूते को सर्वोपरि गिनिये।
जूता ही तो पथ दर्शक है
हम सबके भी अनुभव सुनिये।७।

   अवनीश
💐💐🙏🙏





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