सावन नीक लगे तबसे जबसे बदरा घनघोर देखाता।
भांग धतूर चढ़े शिव के जलधार के धार से शान्ति समाता।पूजिके भक्त सदैव प्रसन्न समस्त अमंगल दूर हो जाता।
भोले के नाम जपे से सुखी सुख शान्ति समृद्धि के देत विधाता।१।
द्वादश ज्योतिर्लिंग अलौकिक साम्बसदा शिवरूप पुजाता।
पण्डित वेद क पाठ करें अभिषेक करें नित मन्त्र सुनाता।
दुग्ध दही घृत शर्करा आसव से विधिपूर्ण नहान कराता।
पूरण होत सदा सतकाम जपे शिवनाम से काल डेराता।२।
नाथ हैं साथ जहां जिनके तिनके सब काज सुकाज हो जाता।
नाम महेश्वर है प्रभु के मृत्युञ्जय से खुद मृत्यु डेराता।
भक्त के झोली भरें त्रिपुरेश्वर वास करें हिमशैल विधाता।
ध्यान धरें शिव नित्य दिगम्बर पूरणकाम करें नित दाता।३।
अवनीश
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