रविवार, 17 जुलाई 2022

पिता

पिता के त्याग तप से ही सुखी सन्तान होती है

पिता के बिन कहाँ ये जिन्दगी आसान होती है।

पिता है वो जो खुदको कर तिरोहित पुत्रहित साधे 

पिता के बिन हमेशा हर खुशी अनजान होती है।१।

पिता ही मार्गदर्शक है भला निःस्वार्थ जो चाहे

बढ़े आगे सदा ही सुत पिता ही है जो ये गाहे।

लुटाता जो बिना परवाह बेटे के लिये हस्ती

पिता ही पुत्र को आगे बढ़ाकर फर्ज निर्बाहे।२।

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