रविवार, 17 जुलाई 2022

देवी स्तुति

 देखि क देवि क शक्ति अपार गये सब राक्षसगन अकुलाई।

मारति काटति टूटि पड़िनि जग शून्य करिनि जगदम्बइ माई।

एक से एक बढैं भट जोधा करैं सब जुद्ध बड़ा बलशाली।
माई करैं सिर हीन हतप्रभ होत महासुर कै भट खाली।

छिन छिन माइ बहावैं रक्त पियैं रणचण्डी विनाशैं काली।
हाथ कपाल लिये अरु खड्ग भयानक रूप धरैं मतवाली।

काँपैं थराथर सैन्य समेत बड़ा मदमस्त रहैं जु मवाली।
भागहिं भागि सकैं नहि राछस दैत्य दलन कई ढारैं काली।

भेजत शुम्भ निशुम्भ महाभट एक से एक महाभट भारी।
माई करै संहार चराचर कै रखवार अहैं महतारी।

देखत जुद्ध अपार करैं सब देव आकास से अस्तुति न्यारी।
देवगणादि भये सब हर्षित फूल कै बृष्टि करैं बड़भारी।

माई सहाय भई जगदम्ब बिपत्ति पड़ी जग पै जब भारी।
आयल जुद्ध करै तब दानव रक्तहिं बीज बड़ा भयकारी।

मारहिं माई जबै ओहि दानव रक्त बहै उपजैं भट भारी।
रक्त धरा पर ज्यों गिरिजात अनेक बढैं दानव व्यभिचारी।

माई कहिनि तब धाइ के चण्डिका झटपट से मुँहवा तूं  बढ़ावा।
रक्त बहै जब रक्तहिं बीज क लै मोहमां तुं समूल चबावा।

देखत देखत खून पड़ा कम अन्त अनन्त भया भटभारी।
मारब रक्तहिं बीज सुनि अति क्रोधित शुम्भ भया भयकारी।

भेजेस भाई निशुम्भ के साथ पठायेस सैन्य बड़ा भयकारी।
जाई निशुम्भ मचायेस ताण्डव देव गयेन डरि सोक में भारी।

ज्यों रणभूमि में देखिनि दुर्गा निशुम्भ पे टूटिनि दुर्गति हारिणि।
बक्ष पे शूल प्रहार करिन्हि महि शून्य निशुम्भ करिनि भयतारिणि।।

क्रोधित शुम्भ सुनेसि बिरितान्त महाभट धायेस धूसर भारी।
सैन्य समेत चलेसि मदगर्वित धूरि उड़ै त अन्हार भा भारी।

जाई महाभट जुद्ध कै भूमि में दुर्गति हारिणि कै लालकरेसि।
त्यों जगदम्बहिं माई के ऊपर बांणन कै बरखा कई ढारेसि।

माई बिलम्ब न कीन्हि गहैं निज हाथ में शूल से शुम्भहि मारैं।
दैत्यमहाबल वीर पराक्रम माई के मारे से स्वर्ग सिधारैं।।

दुर्गति हारिणि दुर्गा भवानि हरा जन कष्ट के दुःख निवार।
माइ सहाइ बना जगदम्ब बिलम्ब किये बिनु भागि सवांर।।

     अवनीश
शिवगङ्गा वसुन्धरा
13/10/2021
  💐💐🙏🙏

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