जहां में जो होता है यार न कर
करता है प्यार तो करार न कर।
जो भी हो सोच समझकर ही चल
जमाने से कभी तकरार न कर।
जिन्दगी है तिरी बेशक अदद सी
वक्त बेवक्त इसे बेकार न कर।
खुशी से झूम ले गा ले मिरे दिल
सभी से प्यार कर कभी रार न कर।
वही करता कराता है जहाँ में
कभी भ्रम मन में तूँ यार न कर।
अगर करना ही है हर हाल में इश्क
प्रभू से कर अपना मन बेजार न कर।
बहुत जालिम है जमाना अवनीश
हर एक शख्श पे ऐतबार न कर ।
अवनीश
शिवगङ्गा
१४/४/२०२३
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