शनिवार, 22 अप्रैल 2023

ग़जल

 जहां में जो होता है यार न कर

करता है प्यार तो करार न कर।

 

जो भी हो सोच समझकर ही चल

जमाने से कभी तकरार न कर।


जिन्दगी है तिरी बेशक अदद सी

वक्त बेवक्त इसे बेकार न कर।


खुशी से झूम ले गा ले मिरे दिल

सभी से प्यार कर कभी रार न कर।


वही करता कराता है जहाँ में

कभी भ्रम मन में तूँ यार न कर।


अगर करना ही है हर हाल में इश्क

प्रभू से कर अपना मन बेजार न कर।


बहुत जालिम है जमाना अवनीश

हर एक शख्श पे ऐतबार न कर ।


   अवनीश

   शिवगङ्गा

१४/४/२०२३

💐💐🙏🙏

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