मातृभूमि की आजादी को लाखों वीर शहीद हुवे
आजादी के दीवाने सब लड़ने को मजबूर हुवे।
पंद्रह अगस्त सन उन्निस सौ सैंतालिस को आजाद मगर
छब्बीस जनवरी उन्निस सौ पचास को हम गणतंत्र हुवे।
तब तक राष्ट्र तरक्की नहीं किया करता जलथल में
जब तक उसका संविधान न हो परिपुष्ट अमल में।
भारतरत्न भीमराव जी के नेतृत्व में कार्य हुआ
तब जाकर गणतंत्र हुये हम सपना तब साकार हुआ।।
इसी खुशी को व्यक्त करें हम हर गणतंत्र दिवस पर
बोध रहे कर्तव्य हमें हम नित्य रहें तत्पर सत्पथ पर।
देश पुनः अपने चरम उत्कर्ष को पाये भारत यह
है यही परम दायित्व कि लहराये तिरंगा अम्बर पर।।
✍️अवनीश
वसुन्धरा
२६/०१/२०२३
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