हे राम अहिल्या के तारक
शबरी उद्धारक राम प्रभो ।
सच्चिदानंघन राम विभो
दशरथनन्दन श्रीराम सुनो।
हे करुणालय जग सर्जक हे
कौशल्यानंदन राम प्रभो ।
हे रघुकुलतिलक महाबल हे
हे राजधर्मधुरि धाम सुनो।
हे ऋषिमुनि तारक राम सुनो
हे जगदुद्धारक राम सुनो।
हे रामरमापति राघव हे
हे घट घटवासी कष्ट हरो।
हे रावणदर्प विनाशक हे
गुरुमातु पिताव्रतपालक हे।
शरणागत रक्षक प्राणप्रिय
हे राम जगद्विश्राम विभो।
हे दुष्टदलन जीवन्मूर्ति
वीरव्रत सखाधर्म पालक।
हे जगस्रष्टा जगपालक हे
श्रीराम नमामि प्रभो सततम्।
नानाव्रत रक्षण हेतु स्वयं
जगपालन हेतु स्वयं आते।
हे राम परात्पर ब्रह्म स्वयं
जग के हो तुम खेवन हारे ।
सुदि चैत्र मास नवमी तिथि को
दशरथनन्दन प्रभु अवतारे।
साकेतधाम सरयूतट पर
रघुकुलभूषण मनुतन धारे।।
अवनीश
शिवागंगा वसुंधरा
१७/४/२०२४
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