गुरु कृपा बनी रहे तो जीव भव से पार है
गुरुजनों को सर्वदा स्वशिष्य हेतु प्यार है।
गुरु के श्रम कठिन से होते शिष्यगण सुबुद्ध हैं
बिना गुरु के जिन्दगी में होता कब सुधार है।
गुरु सदैव ज्ञानदीप्ति की अलख जगाते हैं
गुरुजनों की ही वजह से होती नैया पार है।
गुरुजनों को सर्वदा प्रणाम शिष्यगण करें
गुरुजनों की आशिषों से चलती सर्वकार है।
गुरु दिखाते शिष्य को जगत् में सत्य मार्ग हैं
गुरु से ही निकलता भव के पार का सु-द्वार है।
गुरु ही श्रेष्ठपथ पे शिष्यगण को अग्रसर करें
गुरु कृपा से मिलता ब्रह्मतत्व का भी सार है।
गुरुकृपा से आती है मनुष्यता महीयसी
गुरुजनों में दिव्यता स्वभाव भी उदार है।
अनाथ को सनाथते हैं ज्ञानचक्षु खोलकर
शिष्य शास्त्र सीखते परम्परा अपार है।
करूँ नमन गुरुजनों को पूर्णिमा तिथि के दिन
जीव की जगत् में गुरुकृपा ही पहरेदार है।।
अवनीश
शिवगंगा
२४/७/२०२१
💐💐🙏🙏
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें