यह पुष्प करे मन को पुष्पित
करता नित मन को आकर्षित।
है अपरम्पार सदा इसकी
गुण महिमा आदि करे हर्षित।१।
यह कोमल सुन्दर पुष्पित हो
जनमन को नित सुरभित करता।
आकर्षक ऐसा पुष्प सदा जो
जीव मात्र का चित हरता।२।
भौरे मधुमक्खी सहित सभी
तितली तक पुष्प निरखती हैं।
लेकर पराग इन पुष्पों से
जीवन आनन्दित करती हैं।३।
इन फूलों की महिमा देखो
अमृत सम मधु के कारक हैं।
ये पुष्प प्रभो के दिये हुये
वरदान सदा उपकारक हैं।४।
इनकी ही कृपा से सजती है
हर सभा हैं, होते आयोजन।
फूलों से होते देवार्चन
फूलों से मङ्गल संयोजन।५।
फूलों से ही आरम्भ सदा
होता है अन्त भी फूलों से।
अनुपम उपहार हैं धरती के
विचलित नहि होते शूलों से।६।
ये मन को सुमन किया करते
अत एव सुमन पद वाचक हैं।
हर मन मन्दिर कर देते हैं
ये सरल हृदय आह्लादक हैं।७।
अवनीश
💐💐🙏🙏
रविवार, 18 जुलाई 2021
पुष्प
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