रविवार, 18 जुलाई 2021

दिल की बात

अपने दिल में जो लगी आग बुझानी न मुझे                  दर दर पे यूँ ही फरियाद सुनानी न मुझे।

वफ़ा की चाह नहीं कर रहा मैं तुमसे मगर                बेवफ़ा शख्स से न बात बतानी है मुझे।

चाहा था जिसको मैंने रब से भी बढ़चढ़ कर              छोड़ा था जिसके लिए मैनें अपना घर औ शहर।

बेवफाई किया उस शख्स ने ही सबसे ज्यादा                या ये कह दूं कि खोट मेरी ही किस्मत का था।

सोच कर बात ये अन्दर से सिहर जाता हूँ                    बन के मैं अश्क खुद की आँख से तर जाता हूँ।

गहरा ये दर्द है अवनीश कब बताता हूँ                          मैं तो दरिया हूँ गमों का जो बहता जाता हूँ।

ख्वाब में भी न मगर उसको कभी भूला मैं                  यादों में मैं उसी की ही ये ग़ज़ल गाता हूँ।

अवनीश



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