जमाने हो गये हैं हे प्रभो अब मर्म वह त्यागो। जरा आगे बढ़ो इस प्यास को कमतर न तुम आंको ।
हमारी प्यास की बस आस है अब लेखनी मेरी। यही है प्रियतमा मन की यही है साधना मेरी।
यही आराधना गीता यही सीता यही श्रद्धा। यही है वाहिनी संवाहिनी। प्रिय प्रियतमा बद्धा।
यही मेरी रमा है मनरमा मेरी उमा साध्वी। यही है उर्वशी मेरी यही है मेनका माध्वी।
यही है अंक में मेरे यही मेरी है प्रिय-अंका। यही दीप्ति यही सुरभी यही सुरभित है दिव्यङ्का।
यही प्राणेश्वरी महिमा रमा कल्याणी है काली। यही है जीवनी मेरी विनीता है मेरी लाली।
यही बस जिन्दगी मेरी यही है सहधर्मिणी प्यारी। यही मन की है अभिलाषा। यही है लेखनी न्यारी।।
अवनीश 💐💐🙏🙏
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