रविवार, 18 जुलाई 2021

दिल मेरा घबराता है

दिल मेरा यह हाल देख घबराता है।                         शहर का अब मजदूरों से क्या नाता है।

खून पसीने से अपने था सींचा जिसको।                        बुरे दौर में दामन शहर छुड़ाता है।

आया संकट कोरोना का देश में जबसे।                  सड़कों पर लाचार मनुज दिख जाता है।

जिसने चमकाया शहरों को हो लथपथ।                    आज वही शहरों से फेंका जाता है।

देख दर्द होता है दिल में अब अवनीश।                    दुनियां को रचता क्या एक विधाता है।

मेहनत करने वाला क्यूँ दर दर भटके।                        क्यूँ नेता साहब सेठ ऐंठ  दिखलाता है।

  अवनीश                                                                💐💐🙏🙏 



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