माटी के पुतले हैं हम सब
माटी का नित वन्दन है।माटी देश की थाती है
माटी का अभिनन्दन है।१।
इस माटी से बने सभी
इस माटी में ही मिलते हैं।
ईश्वर माटी के सुख खातिर
एक दिन माटी के बनते हैं।२।
माटी ही तो माता है निज
कोख में पाले जन-जन को।
माटी ही स्वर्णिम शक्ति है जो
प्रेरित करती तन मन को।३।
यह परं भाग्य है हम सबका
इस माटी के आयें काम।
हम भारतवासी माटी को
करते हैं शतकोटि प्रणाम।४।
यह देश प्रमुख है यह भी तो
इस माटी के ही कारण है।
इसकी रक्षा को वीर सदा
करते अतिव्रत को धारण हैं।।
है तिलक हमेशा माटी का
सबके गौरव का दायक है।
माटी को गले लगा कर ही
हुये कई जननायक हैं।६।
निज जन्म भूमि की माटी के
आगे हर सुख बौना है।
रावण की स्वर्णिम नगरी भी
साकेत के आगे औना है ।७।
अवनीश
💐💐🙏🙏
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