रविवार, 17 जुलाई 2022

गज़ल

 आज हूं लाचार धीरज मैं  दिखाऊँगा।

मेहनत से राज करके मैं दिखाऊंगा। 


वक़्त का है काम चलना खुद के ढर्रे पर।

ज़िन्दगी को भी मुक़द्दस मैं बनाऊँगा। 


जो भी दुःखियारे हैं उनके दर्द को हूँ जानता।

दर्द में हमदर्द बनकर मैं हँसाऊँगा। 


वक्त कब रुकता जहाँ में हो भला या हो बुरा।

अनवरत चलता इसे रोक क्या मैं पाऊँगा। 


हौसलों से ही तो होती हैं उड़ानें आसमां में।

बन परिन्दा जोश के पर मैं लगाऊँगा। 


आज के इस दौर में  छाया घना कुहरा तो क्या?।

धैर्य रख अवनीश अच्छे दिन मैं लाऊँगा। 


अवनीश 

31/5/2022

शिवगंगा 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दिल्लीपुलिस

ये दिल्ली पुलिस हमारी है करती सबकी रखवारी है। भय भ्रान्ति मुक्त होवे दिल्ली  हम सबकी जिम्मेदारी है ।१। ये दिल्ली पुलिस हमारी है...... हाँ इस...