गुरुवार, 4 अगस्त 2022

मनभावन सावन

मनभावन सावन नीक लगे
चहुं ओर बयार फुहार जगे।
मनमीत क बाट क जोहि रहे
हिय प्रीति पुकार पुनीत लगे।१।


कब भेंट पिया हमसे करिहैं
अगिया मन के तन के हरिहैं।
बिन पीय के हूक उठे मनमें
सजना एहि पीर के का हरिहैं।२।

पतिया लिखि बाँचि क काटत हम
दिनराति दुवार क झांकत हम।
खटिया गोनरी तकिया चदरा
लइ धावत का पिय पावत हम।३।

सवना बदरा कब नीक लगे
बरखा सजना बिनु फीक लगे।
पुरवा मदमस्त भई मचले
पिय मोर घरे हमरे न चले।४।

झुलवा उनके संग झूलब हम
कजरा बदरा देखि फूलब हम।
गितिया रचि सावन मास सदा 
पियवा दुःख दर्द त भूलब हम।५।

कजरा गजरा टिकुरी बिंदिया
सजिके सजना के निहारब हम।
कुछ रूठि के दर्द सुनाइ सुनब
पियके हिय लागि सवांरब हम।६।

हम पूंछब सौत बसाए ह का
जवने से हमें बिसराइ दिहै।
दिन मास गये बिति जेठ अषाढ़
पिया घर के किनराइ दिहै।६।

अवनीश हरीश के माथ नवैं
पिय हीय में नित्य समाई रहैं।
संग राधिका देवि क साथ सदा
जेहि भांति प्रभू श्रीकृष्ण लसैं।७।


  ✍️अवनीश
      शिवगंगा
   १/८/२०२२
  💐💐🙏🙏

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