हरसूँ वो ही नजर आये किसी और को क्या
दिल को वो ही मेरे भाये किसी और को क्या।
याद उसकी हमें आये लाये खुशी या कि ग़म
दिल में मेरे वो समाये किसी और को क्या।
हम अपने दिल के बादशाह रियाया हैं ख्वाहिशें
चाहे जिसको जो फरमाये किसी और को क्या।
दूर-दूर तक फैला हुआ कुहरा घना तो क्या
मंज़िल हमें बुलाये किसी और को क्या।
गुर्बत में ज़िन्दगी को कह देते बेवफा हैं
हूँ उसे गले लगाये किसी और को क्या।
मुफ़लिसी भी काम की है न होता हूँ मायूस
अपना गैर सब बताये किसी और को क्या।
हम सब हैं मुसाफ़िर है चन्द दिन की भागदौड़
किरदार अपना हम निभाये किसी और को क्या।
दिल चीज क्या हम अपनी जान ओ तन करें कुर्बान।
दिल में उसका नशा छाये किसी और को क्या।
नज़रिया मुख्तलिफ हरेक का है खुद ही देख लो
हरसूँ वो ही नजर आये किसी और को क्या।।
अवनीश
शिवगङ्गा
02/6/2022
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