रविवार, 17 जुलाई 2022

फूल

फूलों को दिल से उगाता कोई

फूल खिलते ही फोटो खिंचाता कोई।


है बनावट की दुनियाँ जहाँ देख लो
काम बनते ही हक़ को जताता कोई।।

फूल खिलते हैं गुलशन में हरदम मगर
उनके जैसी खुशी काश लाता कोई।।

रङ्ग फूलों के होते बहुत से मगर
फूलों सी ताजगी को दे पाता कोई।।

टूटकर भी सदा फूल देते खुशी
उनसे कुर्बां होना सीख पाता कोई।

फूल होते हैं नाजुक बहुत ही मगर
फूल सा सब्र खुद में ले आता कोई।

खुद की कीमत पे औरों को देना खुशी
काश फूलों से ये सीख पाता कोई।

आदमी आदमी से करे बस वफा
बेवफाई को दिल से भगाता कोई।

फूल हरदम खिलें जिन्दगी में मगर
फूल अरमां में शायद समाता कोई।।

  अवनीश
  शिवगङ्गा
02/6/2022

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