ये तपिस तो मौसमी हरगिज नहीं है
स्वस्थ तन मन हो न तो कुछ भी नहीं है।१।आग बरसेगी अगर फिर आसमां से
कौन बोलेगा कि गर्मी ही नहीं है।२।
बीज बोयेंगे कहां से हम सभी
बूंद पानी की अगर गिरती नहीं है।३।
फल चखेंगे आम का कैसे सभी
बीज बोया आप सबने ही नहीं है।४।
दूध पीना चाहते हैं हम मगर
गाय को अब पालता कोई नहीं है।५।
हैं सभी सम्मान पाना चाहते पर
खुद कभी सम्मान करते ही नहीं हैं।६।
जिंदगी में हैं बहुत दुश्वारियां
मंजिलें आसान बिल्कुल भी नहीं हैं।७।
✍️अवनीश
शिवगङ्गा
७/८/२०२२
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