शनिवार, 24 जुलाई 2021

मां बाप पर जाँ लुटाते हैं

 ग़ज़ल:-1222,1222,1222,1222


बहुत ही भाग्यशाली लोग जो खुशियाँ लुटाते हैं।

किया करते हैं सेवा माँ-पिता पर जाँ लुटाते हैं।।


बहुत प्यारे हैं वो बेटे जो माँ की फिक्र करते हैं।

यहीं है वास्तविक अपवर्ग जो बेटे दिलाते हैं।


बढाया है पिता ने सन्तति खुद को तपा करके।

वहीं पी दूध माँ के ही शिशु फिर दौड़ पाते हैं।


नहीं उन्नृण कभी भी हो सकेंगे कर्ज से उनके।

हमें माता-पिता हरदम विपत्ति से बचाते हैं।


फटी जो पाँव में रहती बेवाई बाबू जी के है।

कड़ी मेहनत पसीने से ही बच्चे पाले जाते हैं।


यहाँ घर में सभी मायें किया करती जतन लाखों।

तभी बच्चे सदा माँ से मधुरतं भोज्य पाते हैं।।


इसलिये हैं सभी कहते कि महिमा है बहुत न्यारी।

इसी जीवन में बन ईश्वर स्वयं माँ बाप आते हैं।।


   अवनीश

💐💐🙏🙏


1 टिप्पणी:

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